
इंद्रहार पास ट्रेक
₹11,000 / व्यक्ति
अवधि
3-4 दिन
दूरी
आना-जाना लगभग 28-32 किमी
अधिकतम ऊंचाई
लगभग 4,342 m
सबसे अच्छा मौसम
मई का आख़िर-जून, मध्य सितंबर-अक्टूबर (2026 के ज़िला नियमों के अधीन)
झलक
मैक्लोडगंज के ऊपर सबसे बड़ा ट्रेक इंद्रहार पास ही है। गल्लू देवी मंदिर से रास्ता त्रिउंड तक चढ़ता है, फिर पथरीली रिज पर स्नोलाइन और लाका ग्लेशियर के नीचे लाका गोट से होकर लाहेश गुफाओं तक जाता है -- ये गद्दी चरवाहों के पुराने पत्थर के आश्रय हैं, लगभग 3,500-3,600 मीटर पर, जहाँ कैंप लगता है। समिट डे सुबह लगभग 4 या 5 बजे शुरू होता है और बोल्डर व स्क्री की लंबी ढलान चढ़कर दर्रे के संकरे मुहाने तक पहुँचता है। साफ़ सुबह में यहाँ से एक तरफ़ कांगड़ा घाटी और दूसरी तरफ़ पीर पंजाल और मणिमहेश कैलाश रेंज दिखती है। हमारा स्टैंडर्ड ट्रिप जाकर वापस मैक्लोडगंज लौटता है; चंबा की तरफ़ छाता और कुआरसी होकर पार उतरने का विकल्प अतिरिक्त दिनों और ट्रांसपोर्ट के साथ रिक्वेस्ट पर तय किया जा सकता है। यह एक मुश्किल, हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक है, "त्रिउंड से थोड़ा आगे" वाला नहीं। यह उन फ़िट ट्रेकर्स के लिए है जिन्होंने कम से कम एक मल्टी-डे हिमालयी ट्रेक किया हो और बोल्डर पर चलने में सहज हों। ध्यान दें: जनवरी 2026 में कांगड़ा ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने ज़िले में 3,000 मीटर से ऊपर ट्रेकिंग पर रोक लगा दी थी, और हम पक्का नहीं कर पाए कि शरद ऋतु के सीज़न के लिए यह आदेश ढीला हुआ है या नहीं। हम यह ट्रेक तभी चलाते हैं जब इसकी अनुमति हो, और कोई भी पेमेंट लेने से पहले मौजूदा स्थिति कन्फ़र्म करते हैं। हमारे गाइड सख़्त टर्न-अराउंड नियम मानते हैं (लगभग सुबह 11 बजे तक दर्रे पर नहीं पहुँचे तो वापसी), और त्रिउंड रूट पर हर ट्रेकर फ़ॉरेस्ट चेकपोस्ट पर ₹500 का रिफ़ंडेबल वेस्ट डिपॉज़िट देता है।
कार्यक्रम
दिन 1: गल्लू देवी से त्रिउंड
मैक्लोडगंज या धर्मकोट में मिलें और गल्लू देवी मंदिर (लगभग 2,100 मीटर) से शुरुआत करें। बान और बुरांस के जंगल से, फ़ॉरेस्ट चेकपोस्ट और मैजिक व्यू कैफ़े वाले इलाक़े से होते हुए 6-7 किमी चढ़कर त्रिउंड। ऊपर जाने के बजाय त्रिउंड पर रात रुकने से शरीर को ऊँचाई की आदत (एक्लिमेटाइज़ेशन) में मदद मिलती है। कैंप, डिनर और ब्रीफ़िंग।
दिन 2: स्नोलाइन और लाका गोट होते हुए त्रिउंड से लाहेश गुफाएँ
पथरीली रिज पर चढ़कर स्नोलाइन और लाका ग्लेशियर के नीचे लाका गोट, फिर खड़ी, ढीली ज़मीन और छोटे नालों को पार करते हुए लाहेश गुफाओं तक। गुफाओं के पास टेंट में कैंप। दर्रे से पहले पानी का यह आख़िरी भरोसेमंद स्रोत है, इसलिए यहीं पानी भरकर साफ़ करते हैं।
दिन 3: समिट डे: इंद्रहार पास और वापस लाहेश या लाका गोट
हेडलैंप के साथ सुबह 4-5 बजे तक निकलें। 4-6 घंटे बोल्डर और स्क्री (सीज़न की शुरुआत में सख़्त बर्फ़ भी हो सकती है) पर चढ़कर दर्रे तक, छोटे से मंदिर पर 20-30 मिनट, और बादल घिरने से पहले उतराई। अगर लगभग 11 बजे तक दर्रे पर नहीं पहुँचे या मौसम बिगड़ा, तो हम वापस लौट आते हैं। रात लाहेश या लाका गोट में।
दिन 4: मैक्लोडगंज तक उतराई
त्रिउंड से होते हुए गल्लू देवी और धर्मकोट तक उतरें, रास्ते में चेकपोस्ट पर अपना वेस्ट डिपॉज़िट वापस लें, और दोपहर तक मैक्लोडगंज पहुँचें। बहुत फ़िट ग्रुप अच्छे मौसम में ट्रेक को 3 दिन में भी पूरा कर सकते हैं; यह फ़ैसला पहाड़ पर ही लिया जाता है।
शामिल
- ✓अनुभवी लोकल ट्रेक लीडर और सपोर्ट स्टाफ़
- ✓टेंट, लगभग -5 °C रेटिंग वाले स्लीपिंग बैग और मैट
- ✓ट्रेक का सारा खाना, पहले दिन के लंच से चौथे दिन के लंच तक
- ✓फ़ॉरेस्ट एंट्री फ़ीस
- ✓जहाँ ज़रूरी हो, ज़िला अनुमति या क्लीयरेंस में मदद
- ✓फ़र्स्ट एड किट और इमरजेंसी प्लान
- ✓ग्रुप कैंपिंग सामान के लिए पोर्टर या खच्चर (निचले हिस्से में)
शामिल नहीं
- ✗धर्मकोट / गल्लू देवी तक ट्रांसपोर्ट
- ✗त्रिउंड चेकपोस्ट पर ₹500 का रिफ़ंडेबल वेस्ट डिपॉज़िट (हर ट्रेकर ख़ुद देता है, उतरते समय वापस मिलता है)
- ✗चंबा की तरफ़ पार उतरना, अतिरिक्त दिन और चंबा से वापसी का ट्रांसपोर्ट
- ✗निजी पोर्टर
- ✗ट्रैवल और रेस्क्यू इंश्योरेंस
- ✗टिप्स
- ✗निजी गियर और दवाइयाँ
क्या साथ ले जाएँ
हर जानकारी चाहिए -- रास्ता, फ़ीस, कैंपिंग और सुरक्षा? पूरी ट्रेक गाइड पढ़ें →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 2026 में इंद्रहार पास ट्रेक की अनुमति है?
इंद्रहार पास कितना मुश्किल है?
क्या हम चंबा की तरफ़ पार उतर सकते हैं?
मौसम बिगड़ जाए तो क्या होगा?
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इंद्रहार पास ट्रेक
और ट्रेक
लोकप्रियत्रिउंड ट्रेक
धर्मशाला के पास सबसे लोकप्रिय ट्रेक -- घास वाली एक रिज तक का शानदार ओवरनाइट हाइक, जहाँ से धौलाधार रेंज और कांगड़ा घाटी का 360° नज़ारा मिलता है।
लोकप्रियकरेरी झील ट्रेक
घने जंगलों से होकर धौलाधार रेंज की गोद में बसी एक साफ़-सुथरी ग्लेशियर झील तक का ख़ूबसूरत, कई दिनों का ट्रेक।

गुना देवी मंदिर हाइक
धर्मकोट से जंगल के शांत रास्ते पर गुना देवी (गुना माता) के छोटे पहाड़ी मंदिर तक चढ़ाई, कांगड़ा घाटी के खुले नज़ारे और त्रिउंड की भीड़ का छोटा सा हिस्सा भी नहीं।

थाथराना ट्रेक
धर्मशाला की खनियारा वाली तरफ़ से धौलाधार की ढलान पर एक ऊँचे घास के मैदान तक खड़ी, कम जानी-पहचानी चढ़ाई, रात का कैंप, बड़े नज़ारे और आसपास लगभग कोई नहीं।